November 30, 2023
Biography of Maharana Pratap

महाराणा प्रताप की जीवनी | Biography of Maharana Pratap

महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास में एक महान व्यक्ति हैं, जिन्होंने मेवाड़ की संप्रभुता की रक्षा के लिए शक्तिशाली मुगल साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उनका जन्म 1540 ईस्वी में मेवाड़ के शासक महाराणा उदय सिंह द्वितीय के सबसे बड़े पुत्र के रूप में हुआ था। उनकी भावना और साहस इतना प्रभावशाली था कि वे सभी राजपूत वंशों को एकजुट करने और मुगलों के खिलाफ एक मजबूत गठबंधन बनाने में सक्षम थे।

महाराणा प्रताप की जीवनी | Biography of Maharana Pratap

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महाराणा प्रताप कौन थे? | biography of maharana pratap in hindi
नाम (Name) प्रताप सिंह
प्रसिद्ध नाम महाराणा प्रताप
जन्म (maharana pratap date of birth) 9 मई 1540
आयु 56 वर्ष
लम्बाई लगभग(Height) 7 फीट 5 इंच
वजन (Weight) 80 किग्रा
जन्म स्थान (Birth Place) कुम्भलगढ़ दुर्ग, राजस्थान
पिता का नाम (Father Name) उदय सिंह
माता का नाम (Mother Name) जैवंता बाई
पत्नी का नाम (Wife Name) महारानी अजबदे के अलावा 9 रानियाँ
पेशा (Occupation ) मेवाड़ के राजा
बच्चे (Children) कुल 17 बच्चे, जिनमे अमर सिंह, भगवान दास शामिल है.
मृत्यु (Death) 19 जनवरी 1597
मृत्यु स्थान (Death Place) चावंड, राजस्थान
भाई-बहन (Siblings) 3 भाई (विक्रम सिंह, शक्ति सिंह, जगमाल सिंह),
2 बहने सौतेली (चाँद कँवर, मन कँवर)

महाराणा प्रताप का जन्म कहां और कब हुआ था?

महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को राजस्थान राज्य के कुम्भलगढ़ दुर्ग में महाराणा उदय सिंह और रानी जयवंता कवार के घर हुआ था। महाराणा प्रताप का जन्म राजपूताना परिवार में हुआ था। महाराणा प्रताप के पिता की महारानी जयवंता के अलावा और भी पत्नियां थीं, जिनमें से रानी धीरबाई (रानी भटियानी) राजा उदय सिंह की प्रिय पत्नी थीं।

रानी धीरबाई की इच्छा थी कि उनका पुत्र जगमाल महाराजा उदय प्रताप सिंह का उत्तराधिकारी बने। राणा प्रताप और जगमाल के अलावा महाराणा उदय प्रताप सिंह के दो अन्य पुत्र शक्ति सिंह और सागर सिंह थे। इन दोनों की भी राणा उदयसिंह के बाद गद्दी संभालने की प्रबल इच्छा थी। लेकिन प्रजा और राणा उदयसिंह जी ने प्रताप को अपना उत्तराधिकारी मान लिया था। इसी वजह से ये तीनों भाई महाराणा प्रताप से बहुत नफरत करते थे।

महाराणा प्रताप की पत्नी और बच्चे | maharana pratap family

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पत्नी पुत्र
महारानी अजबदे पंवार अमरसिंह और भगवानदास
अमरबाई राठौर नत्था
शहमति बाई हाडा पुरा
अलमदेबाई चौहान जसवंत सिंह
रत्नावती बाई परमार माल,गज,क्लिंगु
लखाबाई रायभाना
जसोबाई चौहान कल्याणदास
चंपाबाई जंथी कल्ला, सनवालदास और दुर्जन सिंह
सोलनखिनीपुर बाई साशा और गोपाल
फूलबाई राठौर चंदा और शिखा
खीचर आशाबाई हत्थी और राम सिंह

महाराणा प्रताप की लंबाई और उनका वजन

महाराणा प्रताप का कद करीब साढ़े 7 फीट था और इसी के साथ महाराणा प्रताप का कद करीब 110 किलो था. महाराणा प्रताप के सुरक्षा कवच का वजन लगभग 72 किलो और उनके भाले का वजन 80 किलो था।

जब महाराणा प्रताप की तलवार, ढाल और कवच आदि मिलाए जाते थे तो उन सभी का वजन 200 किलो से ज्यादा होता था यानी महाराणा प्रताप 200 किलो से ज्यादा वजन लेकर युद्ध करने जाते थे। महाराणा प्रताप के कवच, तलवार आदि कीमती सामान आज भी उदयपुर राजघराने के संग्रहालय में सुरक्षित रखे हुए हैं।

हल्दी घाटी का युद्ध

यह युद्ध 18 जून, 1576 को मेवाड़ और मुगलों के बीच हुआ था। इस युद्ध में मेवाड़ की सेना का नेतृत्व महाराणा प्रताप ने किया था। इस युद्ध में महाराणा प्रताप की ओर से लड़ने वाले एकमात्र मुस्लिम सरदार हाकिम खान सूरी थे।

इस युद्ध में मुगल सेना का नेतृत्व मानसिंह और आसफ खां कर रहे थे। अब्दुल कादिर बदायुनी ने युद्ध का वर्णन अपनी आँखों से किया। आसफ खान ने परोक्ष रूप से युद्ध को जिहाद करार दिया। इस युद्ध में बिंदा के झालामन ने अपने प्राणों की आहुति देकर महाराणा प्रताप की जान बचाई थी। इसी समय ग्वालियर नरेश ‘राजा रामशाह तोमर’ भी अपने तीन पुत्रों ‘कुँवर शालिवाहन’, ‘कुँवर भवानी सिंह’ ‘कुँवर प्रताप सिंह’ तथा पौत्र बलभद्र सिंह तथा सैकड़ों वीर तोमर राजपूत योद्धाओं सहित चिरनिद्रा में सो गए।

इतिहासकारों का मत है कि इस युद्ध में किसी की विजय नहीं हुई थी। लेकिन देखा जाए तो इस युद्ध में महाराणा प्रताप सिंह की जीत हुई। मुट्ठी भर राजपूत अकबर की विशाल सेना के सामने कब तक टिक पाते थे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, यह युद्ध पूरे दिन चला और राजपूतों ने मुगलों को हरा दिया और सबसे बड़ी बात यह थी कि युद्ध आमने-सामने लड़ा गया था। महाराणा की सेना ने मुगल सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया और मुगल सेना को भागना पड़ा।

मातृभूमि के रक्षक महाराणा प्रताप

जिस समय महाराणा प्रताप राजा बने उस समय मेवाड़ राज्य अत्यंत शक्तिहीन राज्य था। 1572 तक, जलालुद्दीन अकबर ने उत्तर पूर्व और पश्चिम में मुगल क्षेत्रों के साथ मेवाड़ राज्य को पूरी तरह से घेर लिया था। अकबर चाहता था कि महाराणा प्रताप आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएँ। अकबर महाराणा प्रताप पर आर्थिक, सैनिक, राजनीतिक आदि दबाव डालकर मेवाड़ राज्य को बिना युद्ध के हड़प लेना चाहता था।

जैसा कि हमने आपको बताया राणा प्रताप के सौतेले भाई जगमाल जलालुद्दीन अकबर की जागीर पाकर उनके गुलाम हो गए थे अब मेवाड़ राज्य का संकरा पहाड़ी इलाका ही महाराणा प्रताप के पास बचा था। इस पर्वतीय क्षेत्र की लम्बाई लगभग 30 किलोमीटर तथा चौड़ाई लगभग इतनी ही थी।

अकबर के पास अकूत संपत्ति थी, जिसकी तुलना में मेवाड़ का राज्य कुछ भी नहीं था। लेकिन फिर भी महाराणा प्रताप ने अपने शौर्य और शौर्य से अकबर को हरा दिया और उन्होंने अपनी मातृभूमि की भी रक्षा की।

महाराणा प्रताप की मृत्यु

राज्य के कल्याण के लिए ग्यारह साल तक काम करने के बाद 19 जनवरी 1597 को दुर्भाग्य से उनकी नई राजधानी चावंड में उनकी मृत्यु हो गई। ‘एक सच्चे राजपूत, वीर, देशभक्त, योद्धा, मातृभूमि के रक्षक के रूप में महाराणा प्रताप दुनिया में हमेशा के लिए अमर हो गए।

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